What is the purpose of education, what are the types of schools and what kind of education is found in them/क्या है शिक्षा का उद्देश्य विद्यालय कितने प्रकार के होते हैं और उन में किन प्रकार की शिक्षा पाई जाती है

पढ़ाई लिखाई हर कोई करता है पढ़ाई लिखाई पर हर किसी का अधिकार है या फिर आप यह भी कह सकते हैं कि शिक्षा पर हर किसी का अधिकार है शिक्षा हमारे लिए अत्याधिक जरूरी है यहां हमें एक अच्छी राह देता है बिना शिक्षा के एक आदमी को ज्ञान प्राप्ति नहीं होती और प्राथमिक शिक्षा तथा उच्च शिक्षा स्तरीय शिक्षा हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है साक्षरता दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है है आजकल इंसान शिक्षा को अपना व्यवसाय बना लिया है इसे धंधे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है शिक्षा कई प्रकार के होते हैं और उन्हें तरह-तरह भागों में बांटे गए हैं आज के इस आर्टिकल में हम आपको शिक्षा एवं शिक्षा से संबंधित विद्यालयों में होने वाली सभी प्रकार की शिक्षा के बारे में बताएंगे……

• प्राथमिक शिक्षा
प्राथमिक शिक्षा व शिक्षा है जिसमें बच्चे अपने माता-पिता से ही सीखते हैं ज्यादातर बच्चों का दिन माता-पिता के सामने ही कटता है और बच्चे प्राथमिक शिक्षा अपने माता-पिता से ही ग्रहण करते हैं इसके बाद बच्चे समाज में घुल मिलकर सामाजिक शिक्षा ग्रहण करते हैं उन्हें अच्छे बुरे का पता चलता है जब वह समाज में अपना पहला कदम रखते हैं हमें माता-पिता से हमारे माता-पिता द्वारा सिखाए गए एवं दर्शाए गए अनुशासन ही प्राप्त होते हैं समाज से हमें अच्छे बुरे का पता चलता है

विद्यालय कितने प्रकार के होते हैं और हमें उन में किन प्रकार की शिक्षा प्राप्त होती है……
• उत्क्रमित मध्य विद्यालय
जब एक बच्चा केजी से लेकर आठवीं तक पढ़ाई ग्रहण करने के लिए जिस स्कूल में वह विद्यालय में अपना नामकरण करवाता है तो उस विद्यालय का नाम उत्क्रमित मध्य विद्यालय रहता है यह विद्यालय सरकार द्वारा मुफ्त शिक्षा एवं सुविधा उपलब्ध कराती है उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 1 विद्यार्थी को 1 से लेकर आठवीं तक की शिक्षा प्राप्त होती है विद्यालय में आपके बहुत सारे भाई बंधु भी पढ़ते हैं साथ में आपके बहुत सारे मित्रता एवं जान परिचय भी होता है
उत्क्रमित मध्य विद्यालय में हमारा सफर 1 से लेकर आठवीं तक की परीक्षा तक ही होती है इसमें हमें कई प्रकार के शिक्षकों एवं तरह तरह की शिक्षा संबंधित चीजों से रूबरू होती है और हमें पता चलता है कि शिक्षा का प्रारंभिक स्तर क्या है….

• उच्च विद्यालय
उच्च विद्यालय में हम आठवीं के बाद 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त करते हैं यहां से हमारी पढ़ाई का स्तर थोड़ा कठिन हो जाता है हमें आठवीं के बाद नवमी में नाम अकरम करना पड़ता है और दसवीं पास करना पड़ता है जब भी किसी राज्य स्तर में शिक्षा से साक्षरता की गणना होती है तो उसे दसवीं पास किए गए उस राज्य के सभी लोगों की गणना होती है इसीलिए दसवीं पास करना हमारे लिए अत्यधिक आवश्यक है यह साक्षरता का एक सीढ़ी है..
बिना दसवीं पास किए हमें अपने राज्य में साक्षरता की गणना में शामिल नहीं किया जाता है चाहे आप किसी प्रकार की डिग्री क्यों ना कर ले
जब कोई व्यक्ति दसवीं की परीक्षा पास करता है तभी राज्य के स्तर पर उसके साक्षरता का प्रमाण होता है बिना दसवीं की परीक्षा पास किए हुए कोई भी व्यक्ति अपने राज्य के साक्षरता में शामिल नहीं होता है और जब हम उच्च विद्यालय में आठवीं के बाद नामांकन कर आते हैं तब हमें वहां नौवीं से 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त होती है…

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• विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय में हमें उच्च शिक्षा प्राप्त होती है यहां हमें साक्षरता की उच्च स्तर जैसे किसी विषय में हमें डिप्लोमा या उसमें पूरी साक्षरता मिलती है विश्वविद्यालय में हमें बड़े-बड़े प्रोफेसर एवं एक से एक शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त होती है विश्वविद्यालय की शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति को उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त होती है और उन्हें राज्य में अच्छी वैभव शीलता वाली शिक्षा प्राप्त होती है….

शिक्षा हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि बिना शिक्षा के हम समाज में सर उठाकर नहीं जी सकते हैं हमें अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं होगा एक साक्षर व्यक्ति को हर प्रकार से हर तरह की जगह में सफलता प्राप्त होती है आजकल शिक्षा का मतलब एक व्यवसाय हो गया है इसे बड़े-बड़े विद्यालय एवं संस्थाएं इसका प्रचार करके इससे बहुत अच्छे मुनाफे कमा रहे हैं क्योंकि आजकल उच्च शिक्षा प्राप्त करना का मतलब है एक अच्छी उच्च स्तरीय नौकरी प्राप्त करना ना की काबिल इंसान बनना शिक्षा का उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए की शिक्षा प्राप्त करके या शिक्षा प्राप्त सिर्फ एक उच्चस्तरीय नौकरी पाने के लिए करें शिक्षा प्राप्त करने का उद्देश्य एक ज्ञानी एवं साक्षर व्यक्ति बनना है जब तक शिक्षा का उद्देश्य साक्षर होकर नौकरी पाने का रहेगा तब तक देश में कभी भी मालिक पैदा नहीं होगा हमेशा नौकर ही पैदा होंगे क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य काबिल भरना है ना की किसी के लिए काबिल होना है….

जब किसी परिवार में एक व्यक्ति पढ़ा लिखा या पूरी तरह से साक्षर हो जाता है तो उसकी साथ तो पी लिया सुधर जाती है क्योंकि एक शिक्षित व्यक्ति हमेशा शिक्षा के आधार पर ही काम करता है और एक शिक्षित व्यक्ति हर तरह की जगह पर अपना सफलता का झंडा लहराता है क्योंकि शिक्षा उस व्यक्ति को यह सिखा देती है क्या हमें क्या करना चाहिए क्या नहीं…

आजकल तो बिना शिक्षा के आप किसी भी प्रकार की संस्था या कहीं भी कंपनी में काम नहीं कर सकती क्योंकि आजकल कलयुग आधुनिक युग है शिक्षा आजकल बहुत ही महत्वपूर्ण एवं अत्याधिक जरूरी है

 

 

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